उनका अनजान शहर में कोई नही था और रोशनी ने रात को सोने के लिए मुझे कहा और जब मै कमरे में सो रहा था तो उसकी मम्मी के कमरे के अंदर अह्ह्ह आह्ह की आवाज आ रही थी और जब मै देखने लगा तो में सुन हो गया। देसी वासना कहानी में आपका सवागत है आज मै आपको बतऊंगा की कैसे मैंने अपनी गर्लफ्रेंड की मम्मी की चूत की गर्मी को शांत किया।
मेरा नाम राहुल है और मै 25 साल का गोरा स्मार्ट लड़का हूँ और मेरे लंड का साइज 8 इंच बड़ा मोटा और काला है
मुझे चुदाई करने का बहुत शोंक है पर पढाई की वजह से अभी तक किसी को चोद नही पाया बस एक बार अपने पडोसी हॉट भाभी को घोड़ी बनाकर चोदा था पर जब कहानी स्टार्ट हुई उससे बाद मुझे शहर पढने के लिए आना पढ़ा।
मै चूत की तलाश मै शहर मै घूमता रहता।
एक दिन मै जब शहर में घूम रहा था तो मुझे एक लडकी मिली उसका नाम रौशनी था जो की मेरी स्कूल टाइम की गर्लफ्रेंड थी।
मैंने जब उसे 5 साल बाद देखा तो मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया।
उसका भरा हुआ बदन उसके तीखे नेण और उसके बड़े बड़े बूब्स और उसकी मटकती हुई मोटी गांड को देखकर में तो पगला सा गया था।
जब हम दोनों ने एक दुसरे को देखा तो बहुत खुश हुए और एक दुसरे से गले मिले और बाते करने लगे और बातो बातो में एक दुसरे के फोन ले लिए।
अब हम दोनों अपने अपने घर आ गए। घर पर आकर मुझे बेचनी होने लगी और बार बार स्कूल के टाइम की बाते याद करने लगा क्युकी मै इसको चोदने ही वाला था। उससे पहले ही इसकी मम्मी का ट्रांसफर शहर में हो गया क्युकी रौशनी की मम्मी एक सरकारी टीचर थी।
मै उस पल को याद कर कर अपने लंड को हिलाने लगा और वही करीब रात को रौशनी का मेरे पास कॉल आई और हम दोनों एक दुसरे से उस रात तीन चार घंटे बात की और स्कूल के टाइम को याद करने लगे।
ऐसे करते करते कई दिन हो गये और हम दोनों एक दुसरे के करीब आने लगे और मैंने उसे स्कूल की सेटिंग याद कराकर फिर से रौशनी के साथ सेटिंग कर ली।
फिर एक दिन रौशनी ने अपने घर मुझे आने का न्योता दिया और मै सुबहे उसके घर पर गया तो मैंने घंटी बजाई और जैसे ही दरवाज़ा खोला तो मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया आंटी को देखकर मतलब रौशनी की मम्मी को बड़े बड़े बूब्स और टाईट साड़ी और गोरा गोरा बदन मेरा तो मन करने लगा की यही पकड़ कर चोद दूँ।
मै उनकी तरफ ही देख रहा था तो आंटी ने कहा:- कौन?
तो मैंने अपने आप को संभाला और कहा:- की राहुल
आंटी:- कौन राहुल?
फिर मैंने आंटी को अपना परिचय दिया की फिर आंटी ने कहा बहुत बड़ा हो गया है पहचान में ही नही आता।
मेरी नजर आंटी के बड़े बड़े बूब्स से हट ही नही रही थी ?
आंटी ने कहा- ऐसे क्या देख रहा है
अंदर आ जायो की यही दरवाजे पर ही बाते करनी है।
मै अंदर चला गया और मैंने कहा आंटी रौशनी कहा है आंटी ने कहा नहा रही है तू बैठ मै तेरे लिए चाय बनाकर लाती हूँ।
फिर वही रौशनी भी आ गयी और रौशिनी मुझे देखकर बहुत खुश हुई और उसने मुझे अपने पुरे परिवार से मिलाया जब मैंने अंकल के बारे में पूछा तो उसने कहा की अंकल अब नही रहे और उदास होने लगी और मै भी उसके घर से ऐसे ही आ गया।
फिर अगले दिन रौशनी मेरे घर में आई और बातो बातो में में उसके करीब आने लगा और मैंने उसके हाथ को पकड़ा और उसके होठ चूसने लगा और उसने भी मना नही किया और मेरा साथ देने लगी फिर मै उसके बड़े बड़े बूब्स को सहलाने लगा।
जैसे ही मै उसकी कमीज को उतारने लगा तो उसने मुझे साफ साफ मना कर दिया और कहा इसके आगे शादी के बाद फिर अब हम जब भी मिलते बस एक दुसरे को चूसते इसके आगे कुछ नही।
अब धीरे धीरे मेरा रौशनी के घर आना जाना भी बहुत हो गया और अब उसके छोटे बहन भाई भी मेरे साथ परिवार की तरहे रहने लगे और आंटी भी मुझे चाहने लगी।
एक दिन मै रौशनी के घर पर गया और मैंने आवाज लगाई पर आगे से कोई नही बोला इसलिए मै सीधा अंदर चला गया और गेल्लरी में भी कोई नही था इसलिए मैंने जैसे ही कमरा खोला तो में देखकर सुन हो गया।
मैंने देखा की आंटी अपनी साडी को उपर कर अपनी चूत में ऊँगली को जोर जोर से अंदर बाहर कर रही थी और मेरा भी नाम ले रही थी।
मै समझ गया की आंटी तो बहुत बड़ी रंडी है और आंटी की चूत में बहुत आग लगी हुई है आंटी अपनी आँखे बंद करके चूत में ऊँगली दे रही थी।
आंटी को ऐसा देखकर मेरा भी लंड खड़ा हो गया ऑर्ट मैंने भी आंटी को चोदने का मन बना लिया पर आंटी वासना में इतनी डूब गयी की उन्हें अभी भी पता नही चला की मै देख रहा हूँ।
उस दिन घर में आंटी के अलावा कोई नही है फिर मै आंटी के पीछे की और खड़ा हो गया और आंटी की गर्दन को चूसने लगा आंटी ने अपनी चूत से ऊँगली बहार निकाली और मेरी तरफ देखने लगी.
मै भी आंटी की तरफ देखने लगी और मै आंटी के मुम्मे दबाने लगा आंटी वासना भरी आवाज में बोली राहुल क्या कर रहा है प्लीज् छोड़ दे यह ठीक नही।
मै आंटी से कहा की आंटी मुझे आपका अकेलापन देखा नही जाता और मै आपसे बहुत प्यार करता हूँ आंटी मुझे रोकना भी चाहती थी प् चुदना भी चाहती थी और आंटी फुल गर्म थी।
मैंने कहा आंटी बस कुछ मत कहो।
आंटी अगर किसी को पता चल गया तो मैंने आंटी के होठो पर अपनी ऊँगली रखी और कहा बस चुप मै हूँ ना और ऊँगली से आंटी के होठो को मसलने लगा और धीरे धीरे अपने आंटी के होठो पर रख दिए।
अब मै आंटी के गुलाबी होठो को चूसने लगा और आंटी भी मेरे होठो को मस्त होकर चूसने लगी और मै अपने हाथो से मुम्मे दबाने लगा जोर जोर से और आंटी के ऊपर आ गया।
वही आंटी ने भी मेरे लोअर के अंदर हाथ डालकर मेरे लंड को हिलाने लगी और मैंने भी आंटी के बलाउज का हुक खोल दिया और जैसे ही आंटी मुम्मे आजाद हुए और लटकने लगे और मै आंटी के बूब्स की निपल से खेलने लगा और एक बूब्स को मुंह में लेकर चूसने लगा.
वही आंटी कहती जल्दी करो ना रोशिनी आने वाली है फिर मैंने एंटी की साडी खोली और आंटी को नंगी कर दिया और आंटी ने भी मेरे लोअर को निचे कर दिया और अपने मुंह से थूक निकाल कर मेरे लंड के टोपे पर लगा दी और लंड को गुफा के अंदर डालने को कहा। मैंने आंटी की टांगो को अपने कंधो पर रखा और लंड को चूत पर सेट किया और जैसे ही मैंने झटका मारा तो एक ही झटके के अंदर मेरा लंड अंदर चला गया वही आंटी की भी छोटी से चीख निकल गयी ईईइ उईइ आह्ह।
मैंने आंटी की कमर को कसकर पकड़ा और जोर जोर झटके मारने लगा और मुझे बहुत मजा आ रहा था वही थोड़ी देर बाद आंटी ने अपना पानी छोड़ दिया और मै तो लगातार झटके मार रहा था।
वही आंटी ने भी मेरी गांड को पकड़ा और जोर जोर झटके मरवाने लगी और वही मेरा भी पानी निकलने वाला था वही मम्मी ऐसी आवाज आई हम दोनों डर गये और जल्दी जल्दी कपड़े पहने लगे।
वही थोड़ी सी देर मै रौशनी कमरे के अंदर आ गये थे वही मेरे चेहरे पर पसीना देखकर रोशनी ने कहा क्या बात हुई इतना पसीना कैसे आया मैंने जैसे तैसे बहाने लगा कर वह से निकल गया और घर पर जाकर आंटी की चूत को याद कर मुठ मार कर अपने पानी को निकाला।
उस दिन तो बाल बाल बचे अब मै आंटी को मन भरकर चोदना चाहता था।
फिर एक दिन मुझे रोशनी का कॉल आई और कहा हमे कही जाना है और क्या तुम मेरी मम्मी के पास सो जाओ गे।
मै इस मौके का फाईदा उठाना चाहता था
इस कहानी को आगे पढने के के लिए part 2