मौसी के लड़के ने मेरी गांड मारी

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मैं पापा के साथ मौसी के घर गया हुआ था अब तक सब नॉर्मल था पर मुझे क्या पता था की आज मेरी गांड की सेल खुलने वाली थी हम तीनों भाई खेलने लग गए और फिर भाई ने मुझे अजीब से टच करना शुरू कर दिया और फिर मेरी गांड मे अपना लंड पेल दिया और इस तरह मेरी चुदाई हुई।

मेरी गांड की चुदाई की कहानी मे मेरा नाम अंकित है और मेरी गांड की सील खुलने की कहानी शुरू होती है जब मेरी गर्मियों की छुट्टियाँ थी और मैंने मेरी मौसी के घर गया था।

मौसी के दो लड़के है एक का नाम अंकित है और दूसरे का सुरेश और अंकित बड़ा लड़का है और जो दिखने मे सुंदर है पर सुरेश दिखने मे मेरी तरह ही है मैं मौसी के घर पर काफी दिन रहने वाला था तो मैं मौसी के घर पहुँच कर निकर मे ही रहने लग गया।

मैं बचपन से ही देसी वासना कहनी पर गांड चुदाई की कहानियाँ पढ़ा करता था और मुझे ये कहनियाँ पढ़ने मे मजा आता था और फिर क्या मुझे धीरे धीरे लड़कों मे इंटर्सत होने लग गया मैं लड़कियों से ज्यादा लड़कों से प्यार से बात करने लग गया।

मेरी सुरेश के साथा अच्छी बनती थी और वो भी मेरी तरह ही था और हम दोनों एक दूसरे से कोई भाई बात नहीं छुपते थे, मैंने उसे बताया की मुझे लड़की पसंद आते है यार कहीं ये कोई बीमारी तो नहीं है भाई ने मुझे बताया की ये कोई बीमारी नहीं है हम दोनों गे है और हमे लकड़े है पर हम दोनों को ही लड़कों मे ज्यादा मजा आता है।

फिर सुरेश ने मुझे कुछ ऐसा बताया की मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई उसने मुझे बताया की अंकित मेरी गांड मारता है और वो रोज रात को मेरी गांड मे अपने बड़े सारे लंड को डालता है और मुझे भी सच मे मजा आता है।

मैं बना एक चुदक्कड़ गांडू

जब मेरा भाई मुझे अपनी गांड की चुदाई की कहानी बता रहा था तो मुझे सच मे बहुत मजा आ रहा था तो मैंने उसे कहा की भाई दर्द नहीं होता क्या भाई बोल की एक बार होता है दर्द तो पर बाद मे सच मे बहुत मजा आता है।

उस दिन तो कुछ नहीं हुआ और दूसरे दिन हम दोनों एक भाई भाई खेलते खेलते हमने रूम बंद का लिया और फिर अपने अपने लंड को निकाल कर खेलने लग गए और फिर जब मैंने देखा की सुरेश का लंड मेरे लंड से थोड़ा स बड़ा था तो मुझे मजा सा आने लग गया और मैं भाई के लंड को पकड़ कर हिलाने लग गया और फिर सुरेश बोले की भाई बड़े भाई का इससे भी बहुत बड़ा है और उसका जब गांड मे जाता है तो सच मे जन्नत स महसूस होता है।

उसकी बाते सुन कर मेरा भी गांड मे लंड लेने का करने लग गया और फिर मैंने भी काफी सारी काहनियाँ पढ़ी थी देसी वासना कहानी पर की गांड कैसे मरवाते है तो मैंने सुरेश के लंड को पकड़ कर अपने मुह मे ले लिया और बड़े मजे से भाई एक लंड को चूसने लग गया कुछ ही देर मे सुरेश मे अपना माल निकाल दिया और उधर सुरेश ने भी मेरा लंड को पकड़ कर हील कर मेरा माल निकाल दिया।

रात हुई और हम तीनों ही भाई साथ सोने के लिए एक ही रूम मे आ गए और बड़ा भाई ने अपना सारे कपडे निकाल कर साइड मे रख दिए और सिर्फ underwear मे आ गया और हम दोनों को भी बोल चलो अब एक गेम खेलते है तुम भी अपने अपने कपडे निकाल कर साइड मे रख दो।

मैंने भाई से कहा की सुरेश ने बता दिया है की कोनस गेम खेलना है।

भाई बोला की तुझे पता है तो निकाल दे अपने कपडे देर किसकी कर रहा है फिर जल्दी से। मैंने और सुरेश मे अपने अपने सारे कपडे निकाल दिए और अब हम तीनों ही निकर मे आ गए और भाई सुरेश को किस करने लग गया और मेरी जांघ पर हाथ फेरने लग गया और फिर सुरेश ने देर न करते हुए भाई की निकर से भाई के लंड को निकाल कर मुहँ मे ले लिया।

जैसे ही सुरेश ने भाई के लंड को बाहर निकाला तो मैं भाई के लंड को देख कर हैरान हो गया क्यूंकी उनका लंड बहुत बड़ा था और मेरे मुहँ मे भी पानी आने लग गया और भाई को किस करने लग गया।

अब भाई ने देर न करते हुए सुरेश को डोंगी स्टाइल मे किया और उसकी गांड मे अपने मूसल जैसे लंड को पेल दिया और बड़े मजे उसकी गांड की चुदाई करने लग गया और करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद भाई ने अपने लंड को सुरेश की गांड से निकाल कर मेरे मुह न के सामने कर दिया और मैंने भी बिना कुछ सोचे समझे सुरेश की गांड से निकले हुए लंड को अपने मुहँ मे ले लिया।

मैं काफी देर तक भाई के लंड को चूसता रहा और फिर भाई ने मुझे उल्टा लिटा लिया और मेरी गांड मे नारियल का तेल लगा दिया जिससे मुझे दर्द का हो क्यूंकी मैंने पहली कभी भी किसी का लंड अपनी गांड मे नहीं लिया था।

अब भाई ने अपना लंड को मेरी गांड मे सेट किया और एक ही झटके मे अपना आधा लंड मेरी गांड मे उतार दिया और जैसे ही भाई का लंड मेरी गांड मे गया तो मेरी एक दम से चीख निकाल गई मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे किसी ने गर्म गर्म सरिया मेरी गांड मे उतार दिया हो।

मैं झटपटाने लग गया और फिर भाई ने मुझे कस कर पकड़ कर रखा और फिर कुछ देर रुकेने के बाद भाई फिर से अपने लंड को एक बार बाहर निकाल लिया जीसे मुझे मजा सा आ गया मैंने सोचा की भाई सोच लिया होगा की आज नहीं लूँगा इसकी इस लिया बाहर निकाल लिया है लंड।

पर मैं जो भी सोच रहा था सब गलत था क्यूंकी भाई ने जैसे अपने लंड को बाहर निकाल कर एक दम से अपने लंड को फिर से मेरी गांड मे उतार दिया और अबकी बार भाई ने अपना पूरा का पूरा लंड पेल दिया अब मेरी जान निकाल गई और मैं रोने लग गया और उतनी ही देर मे सुरेश मेरे पास आया और मेरे गले पर किस करने लग गया और फिर मेरे होंठों पर किस करने लग गया और जिससे मुझे कुछ देर बाद अच्छा लगने लग गया और फिर क्या भाई ने बिना रुके हुए मेरी गांड की चुदाई को शुरू कर दिया और अब करीब पाँच मिनट बाद मुझे साचे मे मजा आने लग गया।

दोस्तों मेरे गांडु भाई जो भाई ये स्टोरी पढ़ रहे है उन्हे पता है की पहली बार मरवाने मे दर्द होता है पर लेकिन कुछ देर बाद सच मे ऐसा लगता है की लंड को बाहर ही ना निकले और फिर क्या मेरी गांड की चुदाई की कहनी मे भाई मेरी गाडं को बड़े मजे से पेलने लग गया।

करीब 15 की चुदाई के बाद भाई ने अपने लाँड़ की मेरी गांड से बाहर निकाल कर मेरे मुहँ मे पेल दिया और मैंने देखा की भाई के लंड पर थोड़ा थोड़ा खून भी लग रखा था तो मैंने सोच लिया की मेरी गांड की सील खुल चुकी है और अब मैं बिना दर्द के कभी गांड मरवा सकता हूँ।

कुछ ही देर बाद मेरी गांड मे फिर से खुजली सी होने लग गए और फिर मैंने बिना बोले की भाई के लंड को पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया और अबकी बार भाई ने मुझे भी डोंगी बना लिया जाम कर मेरी गांड की चुदाई कर दी अब मैं मौसी के घर पर करीब एक महिना रुका और शायद एक भी दिन नहीं गया होगा की जिस दिन मैंने भाई का लंड का सावड़ न लिया हो।

तो ये थी मेरी गांड की सेल खोलने की कहानी जिसमे मैंने बताया की कैसे भाई ने मेरी गांड मे लंड पेल दिया। अगली कहानी मे मैं बताऊँगा की मेरे एक दोस्त ने सोते टाइम मेरी गांड मे लंड पेल दिया और मेरी गांड को मार दिया।

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